अच्छी आदतें Good Habits

                                                                 अच्छी आदतें Good Habits                                                                        
हमारा ज़्यादातर व्यवहार आदतन होता है | यह बिना सोचे – समझे अपने आप होता रहता है |
 चरित्र हमारी  आदतों का मिला –  जुला रूप होता है | अच्छी आदतों वाला इंसान   अच्छे  चरित्र 
वाला माना जाता है |  ठीक इसी  तरह  बुरी  आदतों  वाला इंसान बुरे चरित्र वाला माना जाता |
आदतें तर्क  और समझदारी से कहीं  ज्यादा  शक्तिशाली होती हैं |आदतें शुरू में इतनी मामूली 
लगती हैं  कि आप   ध्यान नहीं  देते , और बाद  में  वे इतनी मजबूत हो  जाती है कि उनसे  छुटकारा 
मिलना मुश्किल होता है | आदतों का विकास या  तो अनजाने में होता है ,  या फिर निश्चयपूर्वक |
यदि  हमने सोच –   समझ कर आदतें  बनाने का   फैसला  नहीं किया , तो अनजाने में बुरी आदतों 
के शिकार  बन जाएंगे |

हम आदतें कैसे बनाते हैं ? how do we form habits

किसी काम को बार – बार करने से , उसे करना हमारी आदत बन जाती है |

हम कम करने से ही सीखते हैं | साहस भरा व्यवहार करने से हम साहस सीखते हैं |

ईमानदारी और निष्पक्षता की प्रैक्टिस से हम इन गुणो को अपना लेते हैं ,

और इनकी लगातार प्रैक्टिस करने से हम इनमें निपुणता हासिल कर लेते हैं

|इसी तरह जब हम बेईमानी , गलत व्यवहार , या अनुशासन की कमी जैसी

बुरी आदतों की प्रैक्टिस करते हैं , तो उन्हीं में निपुण हो जाते हैं |

हमारा नजरिया हमारी आदत बन जाती है , और हम वैसा ही व्यवहार करने लगते हैं |

वे हमारी सोच बन जाते है , और फिर हमारे व्यवहार की दिशा निर्धारित करने लगते हैं |

आदी होना 

आदी होना conditioning

किसी चीज का आदी बन जाना एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया ( psychological process ) है |इसकी वजह से हम एक दूसरे से जुड़ी किन्हीं खास ढंग की घटनाओं के आदी बन जाते हैं | इसका एक मशहूर उदाहरण पाव्लोव दोवारा कुत्तों पर किया गया प्रयोग है |रूसी वैज्ञानिक ( russian scientist) पाव्लोव (pavlov) कुत्तों को खाना खिलाते समय घंटी बजाया करते थे |खाना देखने पर कुत्तों के मुंह में लार भर जाती है | पाव्लोव अपना प्रयोग कुछ समय तक दुहराते रहे | उसके बाद उन्होने घंटी तो बजाई , पर खाना नहीं परोसा पर कुत्तों के मुंह में लार भर आई , क्योकि वे घंटी बजने के साथ खाना पाने के आदी हो चुका था |

आदी

हमारे अधिकतर व्यवहार चीजों या माहौल का आदी बन जाने का नतीजा होते हैं | हमारा माहौल और मीडिया हमें लगातार कुछ चीजों का अभ्यस्त , या आदी बनाते रहते हैं | नतीजे के तौर पर हम रोबोट की तरह व्यवहार करने लगते हैं | इसलिए हमें स्वयम को अच्छी चीजों का आदी बनाना चाहिए |   

                                                                                                              यदि  हम  किसी चीज को  सही ढंग से करना चाहते हैं , तो यह खुद – ब -खुद होनी चाहिए | यदि हम कोई सही चीज सचेत ढंग से करना चाहें तो वास्तव में उसे सही तरीके से नहीं कर पाएंगे |इसका मतलब यह है कि हमें उसकी आदत बनानी पड़ेगी | जब मैं मार्शल आर्ट ( Martial Art } का स्टूडेंट था तो मैंने गौर किया कि ब्लैक बेल्ट होल्डर भी घूंसा मरने और वार रोकने जैसे साधारण एक्शन (action) की प्रैक्टिस कर रहे थे ताकि जब उन्हें इन कलाओं की जरूरत पड़े तो वे इनका प्रयोग बहुत स्वाभाविक रूप से कर सके |

पेशेवर लोग किसी काम को आसानी से इसलिए कर लेते हैं कि वे अपने काम की बुनियादी चीजों में माहिर हो चुके होते हैं |

कई लोग अच्छा काम कामयाबी पाने के इरादे से करते हैं , पर उसे पाने का हक उन्हीं को होता है जो अच्छा काम आदतन करते हैं |अच्छी आदतों को अपनाना मुश्किल है लेकिन उनके साथ जीना आसान है | बुरी आदतें अपनाना आसान है मगर उनके साथ जीना मुश्किल है |

                                                             अच्छी आदतें Good Habits

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