चार मूर्ख

एक दिन मनोरन्जन के समय बादशाह के मन मे एक बात आई संसार में

मूर्खों की संख्या तो अधिक है परन्तु मै चार मूर्ख देखना चाहता हू|

बादशाह ने बीरबल से कहा इस ढंग के चार मूर्ख तलाश करो कि जिनकी

जोड़े के दूसरे न मिले बीरबल ने कहा जो आज्ञा हुजूर |

ढूँढने वालो को क्या नही मिल सकता केवल सच्ची लगन होनी चाहिये कुछ

दूर जाने के बाद बीरबल को एक आदमी दिखाई पड़ा जो थालो मे पान का

एक जोड़ा बीड़ा और मिठाई लिये बड़े

उत्साह से नगर की तरफ जल्दी – जल्दी भागा जा रहा था |बीरबल ने उस

आदमी से पूछा क्यो साहब यह समान कहा लिये जा रहे हैं आपके पैर खुशी के मारे

जमीन पर नही पड़ रहे है |आपके मर्म को जानने की मुझे बड़ी इच्छा है अतएव

थोड़ा कस्ट कर बतला जाइये |

उस आदमी ने बीरबल को टालने की कोशिश की क्योकि वह अपने नियत

स्थान पर जल्दी

पहुचना चाहता था |परंतु बीरबल ने बार -बार उसे बताने का आग्रह किया तब

वह व्यकित बोला यद्द्पि मुझे विलम्ब हो रहा है|

परंतु आपके इतना आग्रह करने पर बता देना भी जरूरी है |मेरी औरत ने

एक दूसरा खसम रख लिया है उसके बुलावे प उसके न्योते में जा रहा हूँ |

चार मूर्ख

बीरबल ने उस आदमी को अपना परिचय देकर रोक लिया और कहा तुम्हें बादशाह

के पास चलना

होगा तब ही तुम आगे जा सकोगे वह बादशाह का नाम सुनकर डर गया तथा लाचार

होकर बीरबल के साथ हो लिया |

वह इसको लेकर आगे बढ़ा देवयोग से रास्ते मै एक घोड़ी सवार मिला ,वह आप तो घोड़ी पर सवार था पर उसके सिर प एक बड़ा गट्ठर रखा हुआ था |

बीरबल ने उस आदमी से पूछा क्यो भाई यह क्या मामला है |आप सिर का बोझा घोड़ी पर लाद कर

क्यो नही ले जाते |उस आदमी ने उत्तर दिया गरीब परवर मेरी यह घोड़ी गर्भवती है ऐसी दशा मे उस पर इतना बोझा नहीं लादा जा सकता |

यह मुझे ले जा रही है ,यह क्या कम गनीमत है बीरबल ने डरा धमाका कर उस घोड़ी सवार को भी अपने साथ ले लिया |

अब बीरबल दोनों व्यकितयो के सहित बादशाह के पास पहुंचा बीरबल ने कहा तीसरा और चौथा मूर्ख कहाँ है बीरबल बोले तीसरा नंबर आप का है ?

जो आपको ऐसे मूर्खो को देखने की इच्छा होती है |चौथा मूर्ख मै हूँ जो उन्हे ढूंढ कर आपके पास लाया हूँ |

बादशाह को बीरबल के ऐसे उत्तर से बड़ी प्रसन्नता हुई जब उन्हे दोनों की मूर्खता का परिचय मिला तो वह खिलखिलाकर हंस पड़े |

चार मूर्ख

चार मूर्ख

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