बुझो तो जाने

बुझो तो जाने

बेसक न हो हाथ मे हाथ

पर जीता है वह आप के साथ

(परछाई)

साँपो से भरी एक पिटारी ,

सबके मुंह मे एक चिंगारी ,

जोड़ो हांथ तो निकले घर से ,

फिर घर पर सिर पटके |

(माचिस )

काला घोडा सफेद की सवारी ,

एक उठे तो दुसर की बारी |

(तवा -रोटी )

कद के छोटे कर्म के हिन ,

बिन बजाने के सौकिन

(मच्छर )

दो सुंदर लड़के दोनों एक रंग के |

एक बिछड़ जाए तो दूसरा कम न आए |

(जूता )

बुझो तो जाने

न भाड़ा न किराया दूँगी ,

तुम न बुलाओ मै आ जाऊँगी ,

घर के हर कमरे मे रहूँगी ,

पकड़ न मुझको तुम पाओगे ,

मेरे बिन तुम न रह पाओगे |

(हवा )

गर्मी मे तुम मुझको खाते ,

मुझको पीना हरदम चाहते

मुझसे प्यार बहुत करते हो ,

(पानी )

मुझमे भार सदा ही रहता ,

जगह घेरना मुझको आता ,

हर वस्तु से गहरा रिश्ता ,

हर जगह मै पाया जाता |

(गैस )

सीधी होकर नीर पिलाती

उल्टी होकर दिन कहलाती |

नदी

लोहा खिचू ऐसी ताकत है ,

पर रबड़ मुझे हराता है ,

खोई सुई मैपा लेता हु,

मेरा खेल निराला है |

(चुंबक )

*****

ऐसी कौन सी चीज है

जिसे जितना खिचो उतनी

ही छोटी होती जाती है |

(बीड़ी /सिगरेट )

चार है रानिया और एक है राजा

हर कम मे उनका अपना सांझा

(अगूठा और उगलिया )

हाथी घोडा ऊंट नहीं ,खाये न दाना घास |

सदा ही धरती पर चले ,होए कभी न उदास

(साइकिल )

पढ़ने मे ,लिखने मे ,

दोनों मे ही मै आता हु काम |

पैन नहीं हु ,कागज नहीं हु ,

सोचो मेरा क्या है नाम?

(चश्मा )

चाँद सा मुखड़ा तन सा जख्मी ,

बिन पैरो वह चलता है |

राज दुलारा सबका प्यारा ,

मेहनत से वह मिलता है ||

पैसा

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चमन बाहर चिलमन ,

बीच कलेजा धड़के |

नाकू सिन्हा यो कहे ,

दो दो अंगुल सरके ||

(कैंची )

पहेलियाँ

*****

बिन धोये सब खाते है ,

खाकर सब पछताते हैं |

बोलो ऐसी चीज क्या है ,

कहते समय सरमाते हैं ||

(धोखा )

सिर उठा के तोंद घूमा के ,

करते रहते हो तुम बात |

जल्दी से मेरा नाम बताओ ,

वरना करने न दूंगा मुलाक़ात |

(टेलीफ़ोन )

तीन रंग की लहर ,

नील गगन मे भरे उड़ान |

यह है सबकी आखो का तारा ,

हम सब करते इसका सम्मान |

(तिरंगा झण्डा )

हाथ पैर मे जंजीर पड़ी ,

फिर भी दौड़ लगाता |

टेढ़े -मेढ़े रास्तो से ,

गाँव -गाँव घुमाता ||

(साइकिल )

खड़ा द्वार पर ऐसा घोड़ा |

जिसने चाहा पेट मरोड़ा ||

(ताला )

बुझो तो जाने

छोटा -सा काला घर |

पर चलता है इधर -उधर ||

(छाता )

लाल है वो लकड़ी खाये |

पानी पिये मर जाए ||

(आग )

ये धनुष है सबको भाता |

मगर लड़ने के काम न आता ||

(इन्द्र धनुष )

जरा -सी बिटिया |

गज भर की चुटिया ||

(सुई -धागा )

12 घोड़े ,30 गाड़ी |

365 करे सवारी ||

(साल ,महीने , दिन )

एक दुकानदार ऐसा ,

जो दामभी लेता ,माल भी लेता |

(नाई )

खाते हैं इसको सब ,

लेकिन स्वाद न कोई बता सका |

लोग खिलाते भी हैं लेकिन ,

इसे न कोई चख सका |

(कसम )

अजब सुनी इक बात |

नीचे फल और ऊपर पात ||

(अन्नास)

ब्रहमा का पिता चंदा का साला |

कीचड़ मे खिला उसको पाला ||

(कमल)

फुर्र से उड़ती न मै चिड़िया ,

सर्रसी बजती न मै गुड़िया |

मुँह से लगती बजती बढ़िया ,

मै पंजबान -कन्नड उड़िया |

(सिटी )

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