शायरी शेर

शायरी शे

इस कदर उलझे रहे हम अपने ही व्यापार में

फूल तितली , चाँद ,तारे बस पढे अखबार में

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नजर झुका के भी वह दिल को लूट लेते हैं

खुदा ने खूब अदा दी है सादगी देकर

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बड़ी ही सोंधी – सोंधी आ रही है देर से खुशबू

पड़ोसन से जरा पुछो की जालिम क्या पका डाला

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जब दो दिल मिलते है इजहारे हकीकत होती है

ये दुनिया वाले क्या जानें ,क्या चीज मोहब्बत होती है

इस दिल का कोई कदरदान नही मिला जमाने मे

यह शीशा टूट गया ,सिर्फ देखने और दिखाने मे

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रो -रो के तेरी याद मे सुजाई आंखे

देखने वाले यह समझे कि आई है आंखे

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जिंदगी मौत कि रंजिश मे मै खामोश रहा

सौते लड़ती है तो शौहर से क्या किया जाए

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हमने बना लिया है नया फिर से आशिया

जाओ ये बात किसी तूफान से कह दो

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कहु कुछ उनसे मगर यह ख्याल होता है

शिकायतों का नतीजा मलाल होता है

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तेरे गम को तेरी चाहत कि तरह रखा है ऐसे

तेरी अमानत को अमानत रखा है जैसे

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प्यार तो सभी करते हैं निभाता है कोई – कोई

दिल में तो सभी रखते हैं भुलाता है कोई – कोई

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रिश्ते – रिश्ते आँसू – आँसू मन को अंगारों का डर

मेरे घर में जीतने बच्चे उतनी दीवारों का डर


शायरी शेर

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