Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में

Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में

Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में

नमस्कार दोस्तों आप लोग शेखचिल्ली का नाम तो सायद सुना ही होगा | शेखचिल्ली एक गरीब घर से मिलान करते बचपन में इनकी माँ ने बहुत लिखाने – पढ़ाने की कोशिश की लेकिन शेखचिल्ली लिख पढ़ नहीं पाये कुछ कुदरत की देन थी कि शेखचिल्ली कि वजह से लोगों का मनोरंजन हो जाता है इस लेख शेखचिल्ली के ससुराल की कहानी लिख रहा हूँ |

एक बार की बात है शेखजी की औरत नैहर चली गई और एक साल बीत गया | एक दिन उसने ससुराल जाने की ठान ली | माँ से पूछा – अम्मीजान मेरी ससुराल कहाँ है ? मुझे उसका पता बताओ , ताकि मैं वहाँ एक बार हो आऊँ मैं भूल गया हूँ |

इस पर उसकी माँ ने कहा – बेटा तुझमे अक्ल तो है ही नही इसलिए अगर मैंने पता बताया तो तू भूल जायेगा इस लिए मेरी बात का ख्याल रखे तो सीधा अपने ससुराल पहुँच जायेगा यह कहकर उसने कहा-बेटा! तू सीधा अपनी नाक की सीध में चले जाना कहीं से इधर उधर मुड़ना नहीं बस सीधे ससुराल पहुँच जाएगा |

शेखचिल्ली चले ससुराल

यह सुनकर सेखचिल्ली सीधा ससुराल को चल दिया | चलते-चलते उसकी माँ ने कहा बेटा जो साग सत्तू घर में था मैंने बांध दिया है यह पोटली लेता जा और भूख लगने  पर यही साग-सत्तू खा लेना |

शेखचिल्ली अपने घर से चलकर सीधा अपने नाक की सीध में रवाना हुआ | वह जब अपने घर से सीधा मैदान मे दो तीन कोस आगे निकल आया तो सामने एक पेड़ पड़ा | उसने सोचा-माँ ने नाक की सीध मे चलने के लिए कहा था | यह सोचकर वह पेड़ पर चढ़ गया और फिर दूसरी तरफ से उतर कर  फिर नाक की सीध में रवाना हुआ |

आगे चलने पर उसे एक नदी मिली | उसने उस नदी को बड़ी मुशकील  से पार किया और आगे चल पड़ा इसी प्रकार चलते-चलते अपने ससुराल आ पहुंचा |

ससुराल पहुचने पर उसकी भली-भांति खातिरदारी की जाने लगी | परंतु उसने साग-सत्तू छोड़कर कुछ भी खाना स्वीकार नहीं किया क्यो की उसकी माँ ने ऐसा ही कहा था | रात को बचा-खुचा साग-सत्तू खाकर सो रहा रात्री को उसे भूख सताने लगी अब वह क्या करे आखिर भूख से ऊबकर बाहर निकल आया  और मैदान मे आके  पेड़ के नीचे लेट रहा उस पेड़ पर मधुमक्खियों  का एक बहुत बड़ा छत्ता था |

Shekhchilli Ke Karname

छत्ता मधु से इतना ज्यादा भरा हुआ था कि उसमे से रात को मधु टपकता था| शेखचिल्ली जब उस वृक्ष के नीचे लेटा तो ऊपर से उसके बदन पर मधु टपकने लगा | मधु कि कुछ बुँदे उसके मुह मे टपकी तो वह उसे  चाटने लगा और बड़ा खुश हुआ |

कुछ बुँदे उसके बदन पर भी टपकती रही और वह परेसान होकर इधर उधर करवटे बदलता रहा शेखचिल्ली बेवकूफ तो था ही | उसे इस बात का पता नहीं लग सका कि आखिर पेड़ से क्या चीज बदन पर टपक रही है |  निदार लाचार होकर वह वहाँ से उठा और घर के भीतर घुसकर एक कोठरी  मे जाकर सो रहा | उस कोठी के अंदर धुनि हुई रुई रक्खी हुई थी | शेखचिल्ली को नर्म-नर्म रुई मिली तो उसी मे आराम के साथ जाकर सो रहा उसके बदन के चरो ओर शहद  तो लिपटा हुआ था ही, अब धुनि हुयी रुई उसी के साथ बदन मे चारो ओर चिपक गई और उसका बदन और उसकी शक्ल अजीब किस्म कि हो गई सुबह हुई तो शेखचिल्ली की औरत कुछ रुई निकालने उस कोठरी मे घुसी |

शेखचिल्ली चुप

Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में
Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में

तब तक शेखचिल्ली जग उठा था उसको ऐसे रूप में देखकर उसकी औरत चीख उठी उसने हिम्मत बांध कर पूछा कौन हो शेखचिल्ली ने दांट कर कहा -चुप | वह बाहर भागी और अपनी माँ से जाकर कहा-अम्मा! उस रुई वाली कोठरी मे चुप, घुस आया है  उसकी शक्ल बहुत भयानक है यह सुनकर उसकी माँ ने पड़ोसियो को इकठा किया कई लोग उस कोठारी मे घुसे शेखचिल्ली को देखकर सबने पूछा तुम कौन हो  शेखचिल्ली ने फिर चिल्लाकर कहा चुप अब तो उसका ऐसा रूप देखकर सबकी सिट्टी pitti  गुम हो गई सब समझे चुप नाम की कोई भयानक बला घर मे घुस आई है इसे निकालने के लिए किसी सयाने को बुलाना चाहिए कई एक ओझा मौलवी बुलाये गए सबने कितने ही मंत्र जप किए मगर वह चुप नाम की बला नहीं निकली मौलवियों ने सलाह दी कि आप लोग यह मकान खाली करके किसी दूसरे मे चले जाइए वरना यह बला आप लोगो का सत्यानाश कर देगी |

शेखचिल्ली के ससुराल वालो ने यह मकान खाली  कर दिया और दूसरे मकान मे चले गए |

शेखचिल्ली का रात में निकलना

शेखचिल्ली को अवसर मिल गया और वह रात्री के समय उस कोठारी से निकल कर बाहर कि ओर भागा रास्ते मे कुछ चोर दिखाई पड़े | वही एक किसान के बहुत से भेड़ बंधे थे शेखचिल्ली चोरो के डर के मारे उन्ही भेड़ बकरियो के बीच जा घुस कर बैठ गया | उधर वे चोर भी उसी तरफ आ पहुंचे |

चोरो ने कई एक भेड़ो को चुरा लिया उन्ही मे शेखचिल्ली को भी रुई से लिपटा हुआ देख कोई मोटा  भेड़ समझकर साथ लेकर भाग चले | भागते -भागते  वे नदी के किनारे आ पहुंचे इतने मे सुबह होने लगी उन्होने सब भेड़ो को जमीन पर पटक दिया | यह देखकर शेखचिल्ली ने कहा , मुझे थोड़ा धीरे से फटकना |

उसकी आवाज सुनकर चोरो की नानी मर गई उन्होने समझा कि यह कोई भेड़ के रूप मे भयानक बला है जो कि इस तरह बोलती है उन्होने शेखचिल्ली को पानी मे फेक दिया और भाग चले |

उधर पानी मे शहद घुल जाने के कारण शेखचिल्ली के बदन पर चिपकी हुयी रुई साफ हो गई और उसने बदन मल – मल  कर स्नान किया और सुबह होते ही ससुराल आया | दूसरे मकान मे जाकर अपने ससुर से मिला और पूछा-  आपने मकान क्यो छोड़ दिया ससुर ने कहा- मेरे मकान मे कोई चुप नाम की बला घुस गई है |

शेखचिल्ली ने वहाँ जाकर झूठ मूठ  कोई मंत्र पढ़ दिया और फिर कहा- वह बला चली गई आखिर  सब लोग  उसी मकान मे चले आए |

Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में

Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में
Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में

शेखचिल्ली की बड़ी खातिरदारी हुई | वह ससुराल में ही रहने लगा | एक दिन उसने ससुर से कहा – मैं कोई कारोबार करना चाहता हूँ | मुझे एक गाड़ी बनवा दीजिए | दिन में लकड़िया काटुंगा और गाड़ी में लाद कर बाजार में बेचुंगा | ससुर ने बैलगाड़ी बनवा दी | शेखचिल्ली ने जंगल से लकड़ियाँ लाने के लिए बैलगाड़ी जोती बैलगाड़ी लेकर वह चला तो कुछ आगे जाकर गाड़ी जंगल में चर्र – चर्र की आवाज करने लगी | शेखचिल्ली ने सोचा – यह मेरे कारोबार का पहला दिन है और यह गाड़ी साली अपशकुन कर रही हैं | आरे की मदद से    गाड़ी को काटकर टुकड़े – टुकड़े कर दिया तथा उसे वहीं फेंक – फांक कर आगे  लकड़ी काटने चल दिया |

शेखचिल्ली एक मोटा पेड़ देखकर उसी पर चढ़ गया एक बहुत ही मोटी डाल पर जा बैठा और कुल्हाड़ी से काटकर जब थक गया तो आरा हाथ में उठाकर उसी से उसने उस डाल को काटना शुरू किया इतने में एक आदमी नीचे से गुजरा | उसने जब शेखचिल्ली को डाल काटते देखा तो ठहर गया | गौर से देखने पर उसको मालूम हुआ कि शेखचिल्ली उसी डाल को काट रहा था ; जिस पर वह बैठा हुआ था |

उसने कहा – अरे मूर्ख तू जिस डाल पर बैठा है उसी को काट रहा है | इस तरह तू डाल के साथ – साथ खुद भी नीचे गिर जायेगा |

शेखचिल्ली ने कहा – अरे जा जा | मैं भला जमीन पर कैसे गिर सकता हूँ | वह आदमी वही ठहर गया | थोड़ी देर में डाल कट गई और डाल के साथ – साथ सेखचिल्ली भी नीचे आ गिरा |

तब शेखचिल्ली उसको कहने लगा – आप तो बहुत बड़े आदमी मालूम होते हैं | मुझे यह तो बताइये कि मैं कब मरूँगा |

इस पर उस आदमी ने कहा मैं यह सब नहीं जानता मगर शेखचिल्ली कहाँ छोड़ने वाला था | उसने उसका पीछा पकड़ लिया तो उसने जान छुड़ाने के लिए कहा – तू आज शाम को मर जायेगा |

Shekhchilli Ke Karname || भाग 1 शेखचिल्ली ससुराल में

यह कहकर वह आदमी तो चला गया अब शेखचिल्ली ने शोचा कि मुझे आज साम को मर ही जाना है तो अच्छा है कि पहले से ही कब्र के अंदर लेट जाऊँ ताकि मेरे मरने के बाद मेरे रिश्तेदारों को कब्र खोदनी न पड़े |

ऐसा सोचकर वह उसी जंगल में एक गड्ढा खोदकर उसमें लेट गया |

उसी तरफ से एक आदमी जा रहा था | उसके पास एक मटका था वह आवाज लगाता जा रहा था कि अगर कोई इस मटके को मेरे घर तक पहुंचा दे तो मैं उसे दो पैसे दूंगा |

यह सुनकर शेखचिल्ली झटपट कब्र के अंदर से उठ कर खड़ा हुआ और कहने लगा लाओ मैं तुम्हारा मटका ले चलता हूँ |

यह सुनकर उस आदमी ने वह मटका शेखचिल्ली के हवाले किया | शेखचिल्ली उसे लेकर चल पड़ा रास्ते मे यह सोचता जा रहा था कि मुझे इसकी मजदूरी के दो पैसे मिलेंगे | दो पैसे का एक अंडा ख़रीदूँगा उस अंडे से मुर्गी पैदा होगी | उस एक मुर्गी से बहुत सी मुर्गियाँ पैदा होंगी | उन मुर्गियों को बेचकर एक बकरी खरीद लूँगा | बकरी से बहुत सी बकरियां होंगी उन बकरियों को बेचकर एक गाय ख़रीदूँगा | उस गाय से बहुत सी गायें पैदा होंगी | उन्हे बेचकर घोड़ी  ख़रीदूँगा | उस घोड़ी से बहुत सी घोड़ियाँ पैदा होंगी |

शेखचिल्ली का सपना

उन सबको बेचकर बहुत से रुपये मिलेंगे , तब मैं अपना मकान बनाऊँगा | फिर एक घोड़े पर बैठ कर बाजार में सैर करने निकलूँगा | फिर कारोबार करके बहुत सी दौलत पैदा करूंगा | फिर घर में ठाट से साम को बैठक में हुक्का गुड़गुड़ाऊंगा, औरत बच्चों को मेरे पास खाना खाने के लिए भेजेगी |

उस वक्त मैं हुक्का गुड्गुड़ाते हुये ज़ोरों से सिर हिलाकर कहूँगा – अभी खाना नहीं खाऊँगा |

शेखचिल्ली ने ज्योंही अपने ख्यालों में ज़ोरों से सिर हिलाया कि वह मटका सिर पर से गिरकर फूट गया और अंदर का सारा समान मिट्टी में गिरकर खराब हो गया | इस पर उस आदमी ने शेखचिल्ली की खाशी मरम्मत की | शेखचिल्ली का सपना टूट गया |

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